Ayush Speech And Hearing Clinic
How to teach basic manners like eating to autism child
जैसे कि आप सबको पता है कि खाना हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज का हमारा main topic है खाना। अगर normal बच्चो की बात करें तो उनको ये पता होता है कि कैसे खाना है जा फिर क्या खाना है अगर autistic बच्चो की बात की जाए तो उन्हें ये ही नहीं पता चलता कि हमे क्या ओर कैसे खाना है। Autism बच्चे बहुत तरह की difficulties फेस करते है।उनको कोई भी basic काम करने में problem आती है।उनको हर टाइम कोई न कोई अपने साथ चाहिए ताकि वो उनकी needs को पूरा कर सके। आटिज्म बच्चो की खाने की आदतें नॉर्मल बच्चो से अलग होती है।इस topic में हम autism बच्चो के eating manners के बारे में discuss करेंगे।
बच्चो को ये ही नहीं पता चलता कि उन्हें भूख लगी है जा नहीं,कब खाना है क्या खाना है और क्या नहीं।कई बच्चे ओवर ईटिंग करते है।हम बच्चो को जितना देंगे उतना ही खा लेता है।अगर थोड़ा दो तो v खा लेगा अगर ज्यादा दो तो बी खा लेगा।उनको एक्सप्रेस ही नहीं करना आता कि उन्हें भूख लगी है खाना दे दो तो खा लेगा नहीं तो नहीं।parents को ये सब उतना घर पर नहीं पता चलता जितना कि जब बच्चा बाहर जाता है जैसे कि किसी relatives के घर जा किसी function पर जा फिर marriage पर तब बच्चो को पता ही नहीं चलता कि कैसे खाना है।बच्चो को ये भी पता होना चाहिए कि खाना खाने से पहले ओर बाद में हाथ धोने चाहिए।
बच्चे खाने के टाइम एक जगह पर टिक कर नहीं बैठते अगर बैठते भी है तो स्टेबल नहीं बैठते अपने हाथों को हिलाते रहते है।
हमे बच्चो को ये भी सिखाना चाहिए कि खाने के लिए उन्हें सही जगह पर बैठना चाहिए। जैसे कि टेबल ओर चेयर पर बैठ कर खाना चाहिए।बच्चे कही पर भी बैठ कर खाना start कर देते है।
बच्चो को चम्मच का सही तरह से use करना भी सिखाना चाहिए।उनको होल्ड करना ही नहीं आता कि चम्मच को कैसे पकड़ना है।वह हाथों से ही खाने लग जाता है जैसे कि कोई सब्जी जा फिर दाल और अपने हाथ ओर कपड़े गंदे कर लेते है।
बच्चो को ये भी पता होना चाहिए कि small bite तोड़ कर खानी चाहिए। कई बच्चे मुंह में ज्यादा खाना डाल लेते है और मुंह में रखकर बैठे रहते है खाते ही नहीं है। खाने की तरफ उनका ध्यान ही नहीं होता कही ओर ही लॉस्ट हो जाते है और गुनगुनाते रहते है।कई बच्चे खाना जल्दी जल्दी खा लेते है चबाते ही नही है।
खाना खाने के टाइम शांति होनी चाहिए ताकि बच्चे का ध्यान खाने पर ही रहे।autism बच्चो को शोर से बहुत प्रॉब्लम होती है। वो आवाज सुन कर हाइपर हो जाते है और खाना छोड़ देते है।
कई बच्चे खाना खाते टाइम फोन का use करते है। वह स्क्रीनिंग के बिना खाना ही नहीं खाते जिद करते है कि खाना नहीं खाना रोने चिलाने लग जाता है।
बच्चो को ये बी पता होना चाहिए कि वो क्या खा रहा है। उन्हें खाने के टाइम बताया जाए कि वो क्या खा रहे है जैसे कि कोई फ्रूट खा रहा है तो उन्हें बताए कि ये apple है ये banana है।
बच्चे एक ही तरह के खाने से बी बोर हो जाते है।उनको हर रोज अलग अलग खाना देना चाहिए जैसे कि कई बच्चो को सब्ज़ी से बहुत प्रॉब्लम होती है कि सब्जी दाल नहीं खानी। वह रोने चिलाने लग जाते है।बच्चो को आदत डालनी चाहिए कि हर तरह का खाना खाना है।
Last में मै यही कहना चाहती हु कि पेरेंट्स को बच्चो के साथ बैठकर खाना चाहिए ताकि वो parents को देखकर सीखे कि कैसे बैठना है और कैसे खाना है। कुश चीजे बचे देखकर बी सीखते है।