Drooling means
Best speech therapy for toddlers with autism in Jalandhar
Drooling मतलब लार टपकना । बहुत सारे autistic बच्चे लिक्विड पदार्थ जो वह अपने मुँह से निकालते है।यह drooling की समस्या जो है आमतौर पर autism वाले बच्चों में ज्यादा देखा जाता है। saliva निकलना के विभिन्न कारण हो सकते है, जैसे कि मांसपेशियों की कमजोरी होना, निगलने में और टेस्ट करने मे कठिनाई, लार अत्यधिक होना,gums का weak होना आदि । इन कारणो की वजह से जो बच्चो है वह saliva को control नही कर पाते जिसकी वजह से saliva जो है वह continously जो है बाहर निकलता रहता है। Drooling की सम्स्या जो हम कुछ exercise और Mouth activity से control कर सकते है।
Drooling तब तक तो Parents के लिए चिंता विषा नहीं है जब तक बच्चा जो है वह छोटा होता है जब बच्चा थोडा बाल ऊर्म से बड़ा हो जाता है और फिर भी drooling (लार टपकना) कर रहा है तो यह जो parents के लिए जो एक चिंता का विषय बन जाता है।
उदाहरण के तौर पर जब हम अपने मुँह मे जो है पानी भरके रखते है तो हम जो है बोलने मे अक्षम हो जाते है यह same Problem drooling वाले बच्चों में होते है Drooling की वजह से बच्चों के मुँह में जो Saliva इकट्ठा हो जाता है।जिसकी वजह से इनके gums भी जो हैं वह weak हो जाते है और वह अच्छे से बोल भी नहीं पाते है।
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Drooling होने के कारण
Drooling होने कई कारण हो सकते है, Drooling से related कारणो की हम जो नीचे दीऐ गये Points मे चरचा करते है।
1.निगलने में और टेस्ट करने मे कठिनाई
बहुत सारे autism बच्चे जो होते है उनहे जो खाने को निगलने में कठिनाई होती है क्योकि उनके जो gums जो है वह बहुत weak होते है जिसकी वजह से वह खाने को अच्छे से चबा नही पाते है और उन्हें जो है Drooling की problem आती है क्योंकि वह खाने को अच्छे से चबा नहीं पाते है और हमारी लार जो है खाने में मिल के जो हमे खाने की जो स्वाद (Taste) बताने में मदद करती है इस स्थिति में जो है बच्चे है वह खाने के Taste को Judge नहीं कर पाते हैं।
2.मासपेशियो की कमजोरी
कुछ बच्चों मे चेहरे और मुँह की मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है जिसकी वजह से वह जो drooling करते कई बच्चे जो होते है उनमे जो मांसपेशियों बहुत ज्यादा loose होती है और weak होती है जिसकी वजह से उनहे जो है drooling की Problem हो सकती है।
3.लार का उतपादन ज्यादा होना
drooling होने एक कारण जो है वह लार का ज्यादा जो है उत्पादन हो सकता है जिसमे जो बच्चों जो है वह ना चाहते हुए भी जो अपनी लार control नही कर पाता है। तो यह कारण भी जो हो सकता है बच्चो का ज्यादा drooling करने का।
4.संवेदनशीलता में कमी
कुछ बच्चो मे संवेदनशीलता की कभी होती है जिसकी उनहे जो है मुँह आस-पास कोई sense feel नही होता है जिसकी वजह से उनहे जो है,drooling की Problem ज्यादा आती है। क्योकि उनमें जो है संवेदनशीलता की कमी होती है।
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solution
लार टपकना (drooling) को नीचे दीए गये Point से कम किया जा सकता है। जो की नीचे दीए हैं।
1.मोटर थेरेपी = मोटर थेरेपी जो हम है जो बच्चा drool करता है उसकी जो है। मोटर धेरेपी करके
बच्चो की मासपेशिया को मजबूत कर सकते है हम मासपेशिया को कुछ exercise करके मजबूत कर सकते है। जिस में हम cheeks के ऊपर Clockwise and anticlockwise अपने Thumbs से exercise करके ,मासपेशियों को मजबूत कर सकते है।
2.मुँह बंद करना
हम
drooling को है मुँह बंद करके भी control सकते है जिसमें अगर कोई बच्चा drool कर रहा है। तो उसका जो मुँह बंद करवाने की कोशिश करनी चाहिए।
4.अन्य तरीके से=हम drooling को अन्य तरीके से भी control कर सकते है।जैसे bubble blow करवाना, Ballon blow करवाना, Candle Blow करना आदि। इसके इलावा जो है हम brushing करवाना है आदि इस से हम बच्चे के gums को मजबूत बना सकते है।
अंतः हम जो है Drooling को उपर दीए गये तरीके से control कर सकते है
How to treat delayed speech in kids