ऑटिज्म बच्चों में क्या लक्षण होते हैं ?
ऑटिज्म का पूरा नाम ही ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर है। इसीलिए इन बच्चों में ज्यादातर इंटरेक्शन की बच्चों प्रॉब्लम देखने को मिलती है। बच्चे किसी के साथ ज्यादा खुलती मिलते नहीं है ।उनके साथ खेलना पसंद नहीं करते, अकेला रहना पसंद करते हैं। बच्चों में स्पीच की प्रॉब्लम भी देखने को मिलती है।
1) बच्चों में सामाजिक मेल जोन में बहुत ही दिक्कत आती है बच्चा अपना अकेला रहना ही पसंद करता है वह किसी के साथ ज्यादा मिक्स अप नहीं होता अपने ही खिलौने के साथ खेलता रहता है वह सिर्फ अपनी दुनिया में ही मस्त रहता है यह एक ऑटिज्म का लक्षण है जो बच्चों में अक्सर देखने को मिलता है।
2) अगर बच्चा ऑटिज्म होता है तो उनमें जेस्चर ना करना भी देखा जाता है। बच्चा किसी भी चीज को पॉइंट करके नहीं बताता उसे कोई भी चीज चाहिए होती है तो वह बोलकर नहीं बताता तो वह पॉइंट करके भी नहीं बताता कि उसे यह चीज चाहिए यह चीज भी autism बच्चों में देखी जाती है।
3) ऑटिज्म बच्चा किसी को देखकर भी उसकी नकल नहीं उतरता यह भी एक आम लक्षण है जो ऑटिज्म बच्चों में देखने को मिलता है अगर बच्चा किसी भी चीज की कॉपी नहीं करता । जैसे कि आप उसके साथ कोई भी गेम खेल रही हैं तो कोई भी एक्टिविटी कर रहे हैं तो वह किसी भी चीज की कॉपी नहीं कर रहा इसका मतलब है कि बच्चा ऑटिज्म है ।
4) बच्चों की स्पीच डिले होना भी ऑटिज्म बच्चे का ही लक्षण है ऑटिज्म बच्चों को ही बोलने में बहुत ही प्रॉब्लम देखने को मिलती है कई बच्चों की स्पीच बहुत ही दिले होती है और कई बच्चों की स्पीच बिल्कुल भी नहीं होती।
5) ऑटिज्म बच्चे किसी भी तरह की कोई कमान को भी फॉलो नहीं करते वह बहुत ही ध्यान से सुनते हैं लेकिन ना कोई रिस्पांस करते ना ही कोई रिएक्ट करते यह भी एक लक्षण है कि ऑटिज्म बच्चे कमान को फॉलो नहीं करते।
बच्चों की अगर नींद पूरी ना हो तो यह भी एक ऑटिज्म का लक्षण हो सकता है क्योंकि
6)ऑटिज्म बच्चों की नींद अच्छे से पूरी नहीं होती सोने के बाद भी बच्चे जल्दी ही उठ जाते हैं और वह रात को भी 12:00 बजे से पहले नहीं सोते और सुबह जल्दी ही तीन चार बजे उठ जाते हैं। इसीलिए उनका बिहेवियर बहुत ही चिड़चिड़ा हो जाता है।
7) ऑटिज्म बच्चों में बहुत ज्यादा हाइपरएक्टिव बिहेवियर भी देखा जाता है इन बच्चों को बहुत ही ज्यादा गुस्सा आता है और वह बहुत ज्यादा जिद करते हैं। ऑटिज्म बच्चे या तो खुद को मारते हैं या फिर दूसरों को मारते हैं। इन बच्चों को कंट्रोल करना भी बहुत ही मुश्किल हो जाता है क्योंकि यह एक जगह पर टिक कर भी नहीं बैठते इधर-उधर भागते दौड़ते ही रहते हैं।
8) ऑटिज्म बच्चों में काफी ज्यादा सेंसरी इशू भी देखने को मिलते हैं क्योंकि बच्चे को टच से बहुत ही प्रॉब्लम होती है वह किसी से भी टच नहीं लेते अगर उन्हें कोई भी टच करता है तो वह बहुत ज्यादा हाइपर हो जाते हैं। जैसे कि अगर उन्हें पैरों में चप्पल या कुछ डाला है तो वह उनसे निकलना भी नहीं देते अगर कोई निकालने की कोशिश करता है तो वह बहुत ही जोर-जोर से चिल्लाते हैं रोते हैं करने लग जाते हैं और बहुत ही ज्यादा जिद करते हैं।