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हमारी टीम में ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट, और बिहेवियरल थेरेपिस्ट शामिल हैं, जिनके पास वर्षों का अनुभव और विशेषज्ञता है।
Our therapy center stands out for expert care, personalized attention, advanced techniques, and proven results. We provide the best occupational, speech, and behavioral therapy for children and adults.
बात करे पूरे india की तो बहुत से therapy centre , rehab., special school जो कि स्पेशल नीड्स बच्चों को supportive सिस्टम and life skills , adaptive environment या नेचुरल एनवायरनमेंट provide करते है।
अभी हम बात करे थेरेपी सेंटर की , थैरेपी सेंटर में बच्चों के बेवियर के ऊपर काम किया जाता है स्पीच , ADLs , उसके cognition के ऊपर कम किया जाता है,
थेरेपीज आपको इंडिया में किसी भी सेंटर में easily मिल जाएगी
Sensory integration therapy, Jalandhar
CBT OT(occupational therapy) Speech therapy
अभी हम बात करेंगे कि एक अच्छा थेरेपी सेंटर में क्या क्या होना चाहिए , आपने थेरेपी सेंटर choose करते समय कौन कौन सी चीजें ध्यान में रखनी है।
infrastucture
जो भी आप थेरेपी सेंटर में visit करते है, सबसे पहले आपने ये देखना है कि जो सेंटर का इंफ्रास्ट्रक्चर है वो कैसा है therapy tools इंफ्रास्ट्रक्चर में थेरेपी रूम में थेरेपी टूल्स useful होने चाहिए।
Hygiene
environment: साफ सफाई होनी चाहिए।
Parent waiting: area में proper sitting अरेंजमेट होना चाहिए ताकि बच्चे की थैरेपी के दौरान आप डिस्टर्ब न हो हो।
Maids: होनी चाहिए ताकि बच्चे को थेरेपी टाइम अगर हमें छोड़ के बाहर जा रहे है तो को सुसु पॉटी का इश्यू आने पर सब कुछ एडजस्ट हो जाए।
Facilities: सर्दी और गर्मियों में ऐसी एंड हिटर की फैसिलिटी होनी चाहिए।
Staff
therapy centre में स्टाफ की स्किल्स भी आप देख सकते हो कि स्टाफ parent आपके साथ कैसे डील कर रहा है बच्चे को कैसे deal के रहा है, स्टाफ के अन्दर कुछ इस तरह की क्वालिटीज होनी जरूरी है जैसे- पेशेंस, polite, active, punctuality etc. क्योंकि बहुत से थेरेपी सेंटर ऐसे है जहां पर स्टाफ बिल्कुल भी अच्छे से बात नहीं करता है और न ही आपको बताएगा कि थेरेपी में क्या चला है। स्टाफ को बहुत ही calm and सहनशील होना चाहिए क्योंकि अगर वो खुद ही गुस्से में रहेगा उसमें खुद ही स्टेबिलिटी नहीं होगी तो वो बच्चे को कैसे शांत करेगा स्टाफ में पॉजिटिविटी होनी चाहिए क्योंकि जैसी vibe थेरेपिस्ट मे होगी वैसी ही बच्चे में जाएगी।
Child speech development clinic in mota sing nagar
One roof therapy centre
सबसे ज्यादा जरूरी है कि थेरेपी सेंटर में एक ही रुफ के अन्दर या एक ही बिल्डिंग में सारी थेरेपी होनी चाहिए, ताकि आपको और थेरेपी के लिए कही और न भागना पड़े। क्योंकि बहुत से ऐसे थेरेपी सेंटर है जहां पर सिर्फ किसी में सीबीटी करवा रहे है तो स्पीच थेरेपी available नहीं j है। फिर आपको और थेरेपी के लिए कही और जाना पड़ रहा है। इसीलिए थेरेपी सेंटर में सारी थेरेपी होनी चाहिए वन रुफ थेरेपी सेंटर होना चाहिए। जा पर सीबीटी
OT Speech therapy Sensory integration therapy ये सभी होनी चाहिए।
Tricks and techniques of therapy
आपको पता होना चाहिए कि वो किस तकनीकी से थेरेपी करवा रहे है ताकि आप भी घर पर बच्चे को करवा सके।
Guidance
अगर आपको कोई हेल्प या किसी गाइडेंस की जरूरत है तो staff को प्रॉपर हेल्प फूल होना चाहिए।
हमारा सेंटर इसलिए भी बेस्ट है क्योंकि हम डे बोर्डिंग फैसिलिटी भी प्रोवाइड करते है।
डे बोर्डिंग मतलब बच्चे को पूरे दिन के लिए अपने पास रखना , डे बोर्डिंग में बच्चे के सीबीटी, ot, speech इन सब के साथ साथ ADLs के ऊपर भी कम किया जाता है।
बहुत ही कम थेरेपी सेंटर है जो बच्चे की ADLs के ऊपर कम करते है। क्योंकि main तो वहीं है कि बच्चा जो पूरे दिन की एक्टिविटीज है उनको करे, इसीलिए हम ADLs के ऊपर भी focus करते है।
डे बोर्डिंग में बच्चे की generalization skills के ऊपर कम किया जाता है, बहुत से पेरेंट को बच्चे की सीखी हुए चीजों को किसी और चीज में अप्लाई करने में प्रॉब्लम आती है, थेरेपी मे सीखी हुई चीजों को वो घर पर नहीं करवा पाते है।
जब भी आप थेरेपी सेंटर choose करे तो सबसे पहले आपने ये सारे पॉइंट्स चेक करने है ताकि आपको किसी अपने बच्चे के लिए कोई compromise या प्रॉब्लम न face करनी पड़े।
व्यक्तिगत और बच्चों के अनुकूल थेरेपी
हर व्यक्ति की ज़रूरत अलग होती है — हम हर बच्चे या वयस्क के लिए कस्टमाइज्ड थेरेपी प्लान बनाते हैं ताकि उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।
माता-पिता और परिवार को भी समर्थन
हम सिर्फ बच्चों की ही नहीं, बल्कि माता-पिता को भी मार्गदर्शन और सपोर्ट प्रदान करते हैं, ताकि वे थेरेपी के हर चरण में शामिल रह सकें।