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किसी बच्चे को स्पीच थेरेपी की जरूरत है ? जिन बच्चो...

किसी बच्चे को स्पीच थेरेपी की जरूरत है ? 

जिन बच्चों को बोलने में दिक्कत आती है, उन बच्चों को स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है क्योंकि स्पीच थेरेपी में बताया जाता है बच्चों को सिखाया जाता है कि उनको किस तरह से आवाज निकालनी है और कौन सा शब्द कैसे बोला जाता है।

1) स्पीड थेरेपी की जरूरत है ऑटिज्म बच्चों को भी होती है क्योंकि ऑटिज्म बच्चों में यह common लक्षण होता है कि बच्चे की स्पीच नहीं होती या फिर बच्चों की स्पीच डिले होता है। जैसे की 3 साल का बच्चा बहुत ही आसानी से तीन शब्दों को जोड़कर बोल देता है। 3 साल का बच्चा पूरा वाक्य बोलने लग जाता है। इन बच्चों को जब भी कोई चीज जरूरत पड़ती है तो वह बोलकर मांग लेते हैं हर चीज का नाम बता कर बोल देते हैं लेकिन जो ऑटिज्म बच्चे होते हैं वह बोलकर नहीं बताते क्योंकि उनकी स्पीच डिले होती है या फिर किसी बच्चे की स्पीच बिल्कुल भी नहीं होती। स्पीच डिले का मतलब है जितने बच्चे की उम्र है उससे पीछे उसकी स्पीच होना। बच्चों को ही स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है जो थैरेपिस्ट होती है उनकी स्पीच पर काम करते हैं जैसे कि बच्चे कुछ नहीं बोलते तब उनकी स्पीच लाने के लिए उन्हें बहुत कुछ करना पड़ता है। जिससे उनकी स्पीच आ सके। स्पीच थेरेपी से उनकी स्पीच में बहुत ही फर्क देखने को मिलता है धीरे-धीरे बच्चों की जब थेरेपी की जाती है तब बच्चे अपने आप ही बोलने लग जाते हैं, जैसे पहले थे बच्चे उनकी स्पीच में बहुत ही सुधार देखने को मिलता है। 

2) जो बच्चे misarticulation वाले होते हैं जैसे कि बच्चे कई शब्दों को खा जाते हैं या फिर कई शब्दों को जोड़कर उनमें नया शब्द जोड़कर बोलते हैं इन बच्चों को भी स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है । ज्यादातर बच्चों को क ख ग घ को बोलने में दिक्कत आती है। जैसे कि बच्चे बोलते समय शब्दों को खा जाते हैं और एक शब्द की जगह दूसरा शब्द को बोल देते हैं इन दिक्कत को देखते हुए भी बच्चे को स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है स्पीच थेरेपी से बच्चे को सही बोलते शब्दों का सही उच्चारण कैसे करना है यह सब सिखाया जाता है। उन्हें यह सिखाया जाता है कि कौन से शब्द की आवाज कहां से निकल जाती है, मुंह के कौन से हिस्से पर ज्यादा जवाब देकर बोलना चाहिए।

3) CBT वाले बच्चों को भी स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है। क्योंकि इन बच्चों को किसी से बातचीत करने में बहुत ही शर्म आती है। वह अपनी बात खुलकर किसी से नहीं करते ना ही उनके साथ mix-up होते हैं ।इसीलिए उन्हें स्पीच की जरूरत पड़ती है। यह बच्चे पूरा सेंटेंस नहीं बोल पाते बस एक शब्द या दो शब्द में बोलकर की बात करते हैं ।इसीलिए उन्हें सेंटेंस बनाने के लिए किसी की जरूरत होती है ,जो उन्हें समझाएं कि कैसे पूरा एक सेंटेंस बोलना है। इसलिए इन बच्चों को भी स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है क्योंकि थेरेपी से ही बच्चों में इंप्रूवमेंट देखने को मिलता है स्पीच थेरेपी में बच्चों को कैसे बोलना है ।उसे कैसे सेंटेंस बनानी है एक चीज के ऊपर ही कैसे सेंटेंस बनाए जा सकते हैं ।यह सब उसे सिखाया जाता है और स्पीच थेरेपी से बच्चों में बहुत ही ज्यादा फर्क देखने को मिलता है। 

4) जो बच्चे तूतला कर बोलते हैं ,उन्हें भी स्पीच थेरेपी की जरूरत होती है क्योंकि यह बच्चे किसी-किसी शब्द को बीच में खा जाते हैं और तब उनका बोला हुआ कुछ भी समझ नहीं आता। इन बच्चों को भी बोलने में दिक्कत होती है। इसलिए उन्हें भी स्पीच की जरूरत पड़ती है। Speech therapy से ही बच्चों की स्पीच को ठीक किया जा सकता है उनकी कई एक्सरसाइज भी की जाती है जिससे उन्हें बोलने में कोई दिक्कत ना आए और अगर यह थेरेपी लगातार चलती रहे तब उनकी स्पीच में बहुत ही सुधार देखने को मिलता है।
 2024-11-09T05:19:00

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