कुछ ऑटिज्म बच्चे continuously बोलते क्यों रहते हैं? एक ही word या rhyme को repeat क्यों करते रहते हैं? इस behaviour को ठीक कैसे किया जा सकता है
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आपको पता ही होगा कि autism के बहुत सारे symptoms होते हैं जैसे कि
No eye contact
firstly मैं बताती हूं कि जो autism वाले बच्चे होते हैं, mostly उनका eye contact बहुत weak होता हैं। मतलब कि हम बच्चे को बुला रहे वो देख ही नहीं रहा। किसी के face की तरफ देख कर कुछ बोल ही नहीं पाता, आंखों से आंखे नहीं मिलाता। इसके इलावा बच्चा जब भी आप interaction करने की कोशिश करते हो वो आपकी तरफ देखता ही नहीं है। इधर उधर ही देखता रहता है।
Repeatative behaviour
autism बच्चों में बहुत सारे repeatative behaviour होते हैं। जैसे कि किसी काम को बार बार करना, चीजों उठा उठा कर एक ही line में लगाते रहना , एक ही word या sentence को बार बार बोलते रहना, hand flapping, toe walking ये सब repeatative behaviour है।
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No response on name call
अगर हम बच्चे को आवाज़ लगा रहे हैं, बुला रहे है वो सुनता ही नहीं है। आपके बुलाने पर आता नहीं हैं। अगर आप बोलते हो कि बच्चे phone ले लो या कोई chocolate दिखाते हो तभी आता हैं।
No communication autism spectrum
वाले बच्चे किसी के साथ communicate नहीं कर पाते।
No socialization
Autism बच्चों में socialization की बहुत problem होती हैं, किसी बच्चे के साथ खेलना पसंद नहीं करते,किसी का touch पसंद नहीं करते।
Hyperactive
Autism बच्चे बहुत ही ज्यादा hyperactive रहते हैं। टिकते नहीं हैं। भागते- दौड़ते या continously jump करते रहते है। थकते नहीं है बहुत ही ज्यादा active रहते है।
बहुत सारे parents अपने बच्चे की Problems से लेकर आते हैं कि हमारा बच्चा सुनता नहीं है, टिकता नहीं है, hit करता है, किसी को समझता नहीं हैं और mostly parents सारे symptoms को ignore करके only speech पर focus करते हैं कि बच्चे की speech अजाए बस हमारे समझाने पर भी यहीं बोलते हैं कि हमारा बच्चा बिल्कुल ठीक है बस वह बोलने लग जाए। लेकिन यहां parents को समझने की need है कि जब तक बच्चों के other behaviours ठीक नहीं हो जाते speech आना impossible है, क्योंकि अगर बच्चा भागे जा रहा है,टिक नहीं रहा, बात नहीं सुन रहा, वह speech therapy कैसे लेगा। कुछ समझाने या सिखाने के लिए बच्चे का टिकना बहुत ज़रूरी है। अगर बच्चा आराम से टिक कर बैठेगा तभी वह हमें सुनेगा।
तो speech आने के लिए बच्चे में sign बहुत जरूरी है
Sitting कि बच्चा जब तक हम बोले तब तक एक जगह टिक के बैठे। ये नहीं कि उसे एक जगह टिका कर बिठाने के लिए किसी toy, video game या phone का सहारा लेना पड़े। क्योंकि बहुत सारे बच्चे बैठ तो जाते हैं but बिना phone या toy के नहीं।
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Pointing जहां पर हम दिखा रहे है,वो देखे। चीजों को point करे।
Copy करना copy करना in the sense जैसे हम कर रहे हैं, हमारे बिना बोले बच्चा हमें देखकर copy करे। धीरे धीरे बच्चा simple चीजें copy करेगा फिर उसे complex पर लेकर जाना है।
चीजों की identification उसे ज्यादा से ज्यादा चीजों के नाम पता हो। चीजों को identify करे। अगर हम glass, spoon कुछ भी लाने को बोले तो उसे पता हो। क्योंकि जितनी ज्यादा बच्चे के पास vocabulary होगी उसके speech आने के chances उतने ही बढ़ जाते हैं।
Commomds following अच्छे से सारी commonds को सुने और follow करे। Like हमने sitdown बोला वो बैठे, हमने standup बोला वो उठे।
ये तो हो गए speech आने के संकेत अगर ऑटिज्म बच्चा यह सब कर रहा है तो definitaly उसकी speech आएगी। लेकिन अगर बच्चा इनमें से कुछ भी नहीं कर रहा है,बस अपने मन की ही कर रहा है तो इस situation में पहले इन skills पर work होगा फिर ही बच्चा speech के लिए ready हो पाएगा।
अब बात करते हैं बच्चे के लिए continuously बोलने की। बहुत सारे माता-पिता ये बोलते हैं के हमारा बच्चा मम्मा-पापा, काका, दीदी कोई शब्द नहीं बोलता और ना ही कोई sentence बोलता है। लेकिन वो continuously alphabets, counting, rhymes या कोई न कोई word बोलता रहता है।काफ़ी बच्चे ऐसे होते हैं, जिनकी speech तो होती है but वो only कुछ purticular rhymes, lines या words ही बोलते हैं। इससे ज्यादा कुछ नहीं बोलते। वो अकेले बैठे अपने toys से खेलते रहते हैं और continuously बोलते रहते हैं।
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अब बात करते हैं कि autism बच्चे लगातार क्यों बोलते हैं? इसके पीछे क्या कारण है?
Repeatative behaviour Autism बच्चों में बहुत सारे repetitive behaviour पाये जाते हैं। उनमे से बार-बार किसी word या ryhme को दोहराना भी एक repeatative behaviour है।
Proper rest ना करना Rest ना करने या नींद ना पूरी करने से भी बच्चा ये करता हैं।
Parents के पास time की shortage की वजह से भी बच्चे में ये behaviour आ जाते हैं। क्योंकि बच्चा जब अकेला रहता हैं। Parents के पास time नहीं होता। तो बच्चा अकेला रहने की वजह से ऐसा behave करने लग जाता है।
Screentime जब बच्चा बहुत ज्यादा screentime करता है। जैसा बहुत ज्यादा फोन देखता है या टीवी देखता है। तब भी बच्चा ऐसा करने लग जाता है। क्योंकि जो बच्चे की developmental age होती है। जिस आगे में बच्चे अपने आस पास और family members को देख कर बोलना सीखते हैं। वो time उसका screening में निकल जाता है। इसकी वजह से बच्चा वही बोलता है जो वह फोन या टीवी में देखता है। जैसे बच्चों को ryhmes बहुत पसंद होती हैं। बच्चे वही देखते हैं और continuously बोलते रहते हैं। बार बार एक ही चीज देखने की वजह से वो उन्हें याद हो जाती है और वो बार बार उसे ही बोलते रहते है।
Lost होने की वजह से
ज्यादा screentime करने से बच्चे जो फोन में देखते हैं, उसी तरह की imagination करने लग जाते हैं और अपनी imaginory दुनिया में खुद को lost होकर continuously बोलते रहते हैं।
अब इसका Solution जानते हैं कि इस behaviour को कैसे खत्म किया जा सकता है?
Parents को ज्यादा से ज्यादा बच्चों को time देना चाहिए। उनके साथ play करना चाहिए। कई बार बच्चों के लिए जोकर भी बनना पड़ता हैं।
बच्चे का Screentime कम करना चाहिए। बच्चे का mind phone,TV या videos games से divert करके दूसरी activities में लगाना चाहिए। ताकि बच्चे का interest खेलने कूदने में बढ़े।
बच्चे को बाकी बच्चों के साथ group activities करवानी चाहिए। यह करने से बच्चे की social skills develop होती हैं।
Mothers को चाहिए कि वह बच्चे को ज्यादा से ज्यादा अपने साथ घर के कामों में busy रखे।
बच्चे के साथ mix up होना चाहिए। Interaction करना चाहिए।
बच्चे की head और body की exercise करनी चाहिए। ताकि बच्चे को आराम मिल सके।
बच्चे से Oral motor exercise करवानी चाहिए।
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NOTE
अगर आपको अपने बच्चे में ऐसा कोई भी symptom दिखता हैं, तो उसे ignore करके बच्चे की learning age waste नहीं करनी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके उसका diagnose करवाना चाहिए