Nawanshahr
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आज मैं बात करूंगी कि  Which is better, one - Online Therapy or Offline Therapy?


Autism therapy centre in Nawanshahr


हम सब जानते हैं कि online therapy या online consultation का trend corona के बाद ही start हुआ है। यह सब पहले नहीं हुआ करता था। For example, मान लीजिए हम जितनी भी month में  therapy  या consultation देख रहे हैं, उसका 1/4th part online भी देख रहे हैं। All over the world, पता नहीं कहां कहां online therapy या consultation हो रही है।


    What is Online Therapy?

  • Therapist video call के माध्यम से guide करता है

  • घर बैठे accessible therapyLess travel,

  • more flexibilityParental involvement ज़रूरी


जब हम  online therapy ले रहे होते हैं,तो हो सकता है उसे टाइम बच्चा सो रहा हो , irritated feel कर रहा हो या फिर उसका काम करने का मन ना हो, tired हो, तो हम क्या करते हैं कि हम parents से बच्चे की अलग-अलग video clips  मंगवा लेते हैं, जिसमें जब बच्चे का mood fresh हो, तब वह कुछ activities कर रहा हो। जिसमें eye contact हो गया, बच्चे का response to name हो गया, sensory concerns हो गए, behaviour issues हो गए, command following हो गया, बच्चा कितना बोल रहा है, कितना आपके साथ है interact कर रहा हैं, कुछ भी हो सकता है। इससे हमें बच्चे के बारे में बहुत कुछ पता चल जाता है। इस तरह online therapy भी बहुत effective हो जाती है।

Speech therapy in Phillaur


अब सवाल आता है कि अगर Online consultation इतनी  effective हो गई है, तो क्या online therapy भी हो सकती है?


मान लीजिए कि जब आप live therapy ले रहे हैं, तो हो सकता है कि बच्चे का आज मन इससे खेलने का ना हो, तो मैं झट से जान जाऊंगी, और कुछ ओर उठा लूंगी और बच्चे को दिखाते हुए बोलूंगी कि चलो, चलो, चलो।आज हम इससे खेलेंगे। उसके बाद मैं कुछ ओर उठा लूंगी, जिससे क्या होगा कि बच्चे का offline session में जो ध्यान है,  वह मैं एक जगह से हटा कर दूसरी जगह पर लगा दूंगी। इस तरह definitely रिजल्ट आएंगे, क्योंकि आप at the moment बच्चे के mood के according काम करवा रहे हैं। ना कि forcefully एक ही toy के साथ बार-बार वही repitition में काम नहीं करवा रहे हैं। आप  according to the situation, बच्चों के mood के according अपनी therapy में change ला रहे है। जिससे कि बच्चा bore नहीं होगा और  definitely वह आपको cooperate करेगा। यह सारी चीज़ offline में ही मिल सकती है, online में नहीं।

Online में सबसे बड़ी disadvantage यह है कि parents ने हमें जो online videos भेजी होती है, हम उसके according की एक pattern बना लेते हैं कि चलो भई, हम इस-इस पर काम करेंगे। इसमें सबसे पहले तो parents को उनके बच्चे के बारे में A to Z पता होना चाहिए, क्योंकि parents जितना अपने बच्चे को समझेंगे, वो वही information हम को देंगे। तो हो सकता है कि parents ने हमको पूरी information न दी हो,जिसकी वजह से बच्चों के कुछ behaviours हमसे miss हो जाए। तो इधर आप हमको online वीडियो बनाकर भेजिए कि भई, इधर मेरे बच्चे को कोई प्रॉब्लम हो सकती है या कोई प्रॉब्लम है। जिससे therapist को बच्चे के बारे में deeply पता चल पाए।

 Online speech therapy for kids in India


 तो अब आता है कि parents हमें क्या information दे कि उन्हें Best Online Therapy मिल सके?


यहां यह बात तो proof हो गई है कि Offline is better than Online, क्योंकि offline में therapist according to child's mood काम करवाएंगे। But जो online होगा, उसमें parents जो therapist को information देंगे, उसके according ही बच्चे पर work होगा। इधर यह भी हो सकता है कि जो parents को लगे कि यह बात उनके किसी काम की नहीं, हो सकता है वह therapist के लिए बहुत useful हो। इसके opposite भी हो सकता है कि कोई बात parents को टेंशन देने वाली लगे, वह therapist के किसी भी काम की ना हो।

 For example, मान लीजिए हमारे पास कोई parents आए और उन्होंने बोला कि मेरा बच्चा तो सब कुछ बोलता है, poems गाता है, rhymes बोलता है। But, जब हमने बच्चे की therapy start करी, तो वह बिल्कुल चुप हो गया। कुछ भी नहीं बोला। इधर  parents का reaction होगा कि भई, मेरा बच्चा तो therapy के बाद बोलना ही बंद कर गया। यह तो therapy का बहुत ही बड़ा side-effect और disadvantage हो गया। But, इधर ये बात है कि जो आपका बच्चा आते जाते कुछ भी बोल रहा है, कुछ भी rhymes गा रहा है, कोई भी words बोल रहा है या poems गा रहा है, चलते फिरते किसी का भी नाम ले रहा है, वह सब unnecessary talking में आता है, उसको हम verbal नहीं कह सकते कि हां भई, इस बच्चे की proper speech है।

But parents के लिए उनका बच्चा बोल रहा है। उनको लगता है कि अगर बच्चा बोल रहा है, तो वह verbal  है। सबसे पहले हमने बच्चे की वही unnecessary talking की आदत हटानी है कि वह बेकार में कुछ भी न बोले। Therapist के लिए वह बच्चा non- verbal के अंदर आता है, क्योंकि बच्चा बिना पूछे कुछ भी बोल रहा है। But जब therapist पूछता है, तो वह चुप कर जाता है। तो यहां पर parents अच्छी चीज़ को बुरा और बुरी चीज़ को अच्छा भी बता सकते हैं।

Occupational therapy for autism in Punjab


बहुत बार ऐसा होता है कि बच्चा हमको खींच कर लेकर जाता है कि मैंने इधर जाना है, मुझे वो चाहिए, मुझे वह दिला दो। बच्चा उसे तरफ point भी करता है। But जब हम बच्चे से पूछते हैं कि चलो बताओ टेबल कहां है, मम्मा कहां है, fan कहां है, तो वह कुछ भी नहीं बोलना। ना ही कुछ express करता है, ना ही उस तरफ point करता है। तो जब बच्चा हमारे कहने पर यह नहीं बताता कि यह टेबल है, यह मम्मा है, यह fan है, यह ice-cream है, तो वो pointing towards object नहीं हुआ। 
Pointing towards object दो तरह के होते हैं 

1. एक होता है कि खुद ही दूसरे को दिखाना कि यह देखो ये रहा टेबल, ये रहा sun, ये रही मम्मा ।  
2. दूसरा होता है कि तुम मेरे पूछने पर मुझे दिखाओ। उस तरफ point करो कि मम्मा कहां है,  पापा कहां है, fan कहां है। ये दूसरी तरह का pointing towards object होता है। So I am more interested in second type of pointing toward object.


Speech delay treatment in Nawanshahr


Ayush Speech and Hearing Clinic
Street No. 8, House No. 946,
Hargobind Nagar, Phillaur,
Nawanshahr – 144410, Punjab, India
📞 Phone:    095015 93647
🌐 Website: www.ayushclinic.org
📧 Email: Ayushspeech999@gmail.com


 2025-04-29T14:56:37

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