ऑटिज्म बच्चों को लेकर होने वाले प्रश्न क्या ऑटिज्म बच्चों को मोबाइल फोन देखने से ऑटिज्म हो जाने का खतरा ज्यादा पड़ जाता है हां जी अगर आपका बच्चा हद से ज्यादा स्क्रीन टाइम ले रहा है या फिर मोबाइल फोन का उसे कर रहा है तो उसमें ऑटिज्म होने के खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है क्या ऐसा कोई बच्चा जो पढ़ सकता है लिख सकता है सुन सकता है और बोल भी सकता है क्या ऐसे बच्चों को ऑटिज्म हो सकता है ऐसे बच्चों को भी ऑटिज्म हो सकता है जो पढ़ लिख सकते हैं बोल सकते हैं समझ सकते हैं पर ऐसे बच्चों की जांच करके इस चीज का ज्यादा पता लगाया जा सकता है कि उनको ऑटिज्म कौन से चरम पर है क्या ऑक्यूपेशनल थेरेपी सर्फ गेम खेलना पजल सॉल्व करना या फिर खेलना कूदना है हां जी ऑक्यूपेशनल थेरेपी में यह सब एक्टिविटीज करवाई जाती है क्या ऑटिज्म पूरी तरह से ठीक हो सकता है हां जी ऑटिज्म पूरी तरह से ठीक हो सकता है अगर इसकी समय रहते जांच की जाए अगर बच्चे का लेवल कम है और वह समय से पहले ही पकड़ में आ गया है तो ऑटिज्म को पूरी तरह से ठीक भी किया जा सकता है क्या ऑटिज्म बच्चों में इमोशंस नहीं होते हां जी इमोशंस होते हैं ऑटिज्म बच्चों में भावनाए होती है पर वह अपनी भावनाओं को सही ढंग से प्रकट करना नहीं जानते ऑटिज्म बच्चे इंडिपेंडेंस होते हैं हां जी ऑटिज्म बच्चे इंडिपेंडेंस होते हैं क्या कोई भी थैरेपिस्ट ऑटिज्म बच्चों को थेरेपी दे सकता है नहीं कोई भी घर किस्त कोटेशन बच्चों को भारती नहीं दे सकता जब तक उनका काम की पूरी तरह से जांच ना हो और उनके पास एक अपने काम के प्रति एक अच्छे लेवल पर सर्टिफिकेट ना हो या फिर आर्थरपिस्ट को अच्छे से काम करना ना आता हो यह सपादों का ऑपरेशन बच्चों के लिए ध्यान रखना होता है और एक अच्छी ऑटिज्म से ही बचेगी स्टार्ट करवानी होती है