Hoshiarpur
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Therapy center में आने के बाद बच्चे लगातार रोते क्...

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Therapy center में आने के बाद बच्चे लगातार रोते क्यों रहते हैं? 
और therapy center में सबसे पहले बच्चे की कौन सी skill पर work किया जाता है?

Why does my child cry at a therapy center in Hoshiarpur?



आज हम बात करेंगे कि therapy center में सबसे पहले बच्चे को क्या सिखाया जाता है। आपने देखा होगा कि therapy center में आने के बाद mostly बच्चे दो तीन दिन या हफ्ते,दो हफ्ते रोते ही रहते हैं। उनको चुप होने में ही काफी दिन लग जाते हैं, उनके रोने की वजह से काफी parents worry भी होते हैं, कि हमारा बच्चा तो रोता नहीं, खुश रहता है।

 तो वह center में इतना क्यों रोता है, कहीं बच्चों को डराते या मारते तो नहीं है। क्योंकि ज्यादातर माता-पिता के मन में यही आता है कि पता नहीं क्या करवा रहे हैं, जो बच्चा इतना ज्यादा रो रहा है। आपने देखा होगा कि काफी बच्चे therapy center से बाहर आते ही चुप कर जाते हैं और खुश हो जाते हैं। कई बच्चे घर से चलते time ही रोना start कर देते हैं। 

Why does your child cry when he goes to a therapy center? You are not alone - this is very common, and there are some deep reasons behind it


जब parents उन्हें घर पर सेंटर के लिए तैयार कर रहे होते हैं, बच्चे तैयार नहीं होते, कपड़े नहीं पहनते, नहाते नही हैं, जिद करते हैं और रोने लग जाते हैं। माता-पिता इस बात से परेशान  हो जाते हैं। वह सोचते है कि बच्चे को center से हटा लेते हैं। But ऐसा करने से बच्चे का सिर्फ नुकसान होता हैं।

Child behavior at the therapy center in Hoshiarpur


 पहले मैं आपको बताती हूं कि बच्चे रोते क्यों हैं, क्या कारण हैं जो बच्चे थेरेपी सेंटर में चुप में  इतना time ले लेते हैं?

1. Environmental change 
2. New place and new person 
3. Comfort zone 
4. Behaviour के opposite work होने के कारण 
5. Touch की वजह से 
6. Proper rest ना करने की वजह से 
7. बीमार होने की वजह से 

Envoirment change  होने पर भी बच्चे रोना शुरू कर देते हैं। घर पर वह किसी जगह पर भी भाग दौड़ सकते हैं, but therapy centre में अंदर अंदर रहना उन्हें पसंद नहीं होता।new envoirment में ढलने के लिए उन्हें time लगता हैं।
 
New place and new person  नई जगह और नई लोगों को देखकर भी बच्चा uncomfortable हो जाता है। इसलिए वह रोना शुरू कर देता है। क्योंकि कई बार हम बड़े भी  किसी नई जगह पर जाते हैं, नए लोगों से मिलते हैं,जिनको हम पहले कभी नहीं मिले होते। तो हमें भी झिझक होती है। वह तो अभी बच्चे हैं। इसलिए उन्हें थोड़ा टाइम लगता है चुप होने में, जब बच्चा therapist के साथ घुल मिल जाता है, तो वह चुप कर जाता है ।

First day of the speech therapy centre in Hoshiarpur



 Behaviour के opposite work होने की वजह से therapy center में ऑटिज्म बच्चों को ABA (Applied behaviour analysis) therapy provide की जाती है। जो बच्चों के व्यवहार के opposite होती है। मतलब जो बच्चे को करना पसंद है वह नहीं करना देना और जो नहीं पसंद वो करवाना।

 Example
जैसे बच्चे को toe walking Krna पसंद हैं और therapist toe walking नहीं करने देते। बच्चे को mobile देखना बहुत पसंद होता हैं और therapy center में बच्चे को mobile phone देने की मनाही होती हैं। जब बच्चे की मर्ज़ी नहीं चल पाती तो वह रोना शुरू कर देता हैं।

 Touch issue बहुत सारे बच्चों को touch related issues  होते हैं, उन्हें किसी का touch नहीं पसंद होता है। जब थेरेपिस्ट उसे अपनी गोद में लेते हैं, तो बच्चा रोने लग जाता हैं।

 Proper rest ना करने की वजह से बहुत सारे बच्चे proper rest नहीं करते। दौड़ते कूदते रहते हैं,आराम नहीं करते और जब भी सेंटर में उनके behaviour पर work होता है। तो वह नींद की वजह से या आराम ना करने की वजह से irritate हो जाते हैं और रोते रहते है। इसलिए हम बोलते हैं कि बच्चे के ठीक होने के लिए proper rest और proper sleep भी बहुत जरूरी होती है। 

 Sick होने की वजह से अगर बच्चा थोड़ा बीमार है, बुखार है या सर्दी की वजह से तो हम उसे कोई भी काम करवाएंगे,तो वह और ज्यादा irritate होंगे, इसलिए बीमार होने की वजह से भी बच्चे थेरेपी सेंटर में रोते रहते हैं।

Sensory issues in therapy sessions near me


यह कारण है जिसकी वजह से बच्चा थेरेपी सेंटर में आते समय थोड़े दिन या एक दो सप्ताह रोता रहता है। जब बच्चा therapist के साथ mixup हो जाता हैं, तब वह चुप हो जाता हैं।

 माता-पिता क्या करें?


Consistency बनाए रखें

घर पर similar activities दोहराएं

Therapist से रोज feedback लें

Patience रखें — बच्चे को समय दें adjust करने के लिए


 अब बात करते हैं कि थेरेपी सेंटर में सबसे पहले बच्चे को क्या सिखाया जाता है और किस skill पर सबसे पहले काम किया जाता है? 

जैसा की आपको पता है therapy center में बहुत सारे माता-पिता अपने बच्चों की समस्याएं लेकर आते हैं, उनमें से कुछ बच्चे ASD होते हैं, कुछ ADHD होते हैं, कुछ बच्चों की Speech delay होती है। और कुछ बच्चों को misarticulation, stammering, learning disability जैसी problems होती हैं।

अगर हम बात करेंगे सबसे पहले बच्चे की किस skill पर work किया जाता है,तो इसका जवाब है यह है कि बच्चे की need के according therapist work करते हैं क्योंकि हर बच्चे की समस्या अलग होती है। जैसे कि speech, misarticulation, stammering वाले बच्चों की तो speech therapy ही होती है। सीधे sitting  से ही क्योंकि यह बच्चे बड़े होते हैं। मतलब 4 से 5 साल के या  इससे ज्यादा कुछ बच्चे 16 17 साल की भी होते ह। क्योंकि misarticulation and stammering की problem  तब ही देखने को मिलती है,जब बच्चा पूरा बोलना शुरू कर देता है। तो इन्हें सारी समझ होती हैं।

पर main बात आती है, ASD AND ADHD बच्चों की कि उनकी कौन सी बातों को ध्यान में रखकर हम सबसे पहले कौन सी skill पर work करते हैं। जैसे कि आपको पता होगा कि जो ASD और ADHD बच्चे  होते हैं। उनकी sitting नहीं होती concentrate नहीं कर पाते, lack of eye contact, lack of communication, lack of attention, no response on name call, body balance, sensory issues, behaviour issues* ऐसी बहुत सारी problems होती है।

जब बच्चा थेरेपी सेंटर में आता है। वह भागता दौड़ता रहता है, toys इधर उधर उठाकर फेंकता है, किसी की सुनता नहीं है और अगर उसे कोई गोद में उठाता है तो बच्चा रोने लग जाता है। इसमें से कुछ बच्चे इतने hyper होते हैं कि वह therapist को मार भी देते हैं या bite भी कर देते हैं।

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तो सबसे पहले जिस skill पर work करते हैं वो हैं

Sitting सबसे पहले बच्चे की sitting पर काम किया जाता है। क्योंकि अगर बच्चा टिक कर बैठेगा ही नहीं तो वह हमारी बात कैसे सुनेगा, कुछ सीखेगा कैसे तो सबसे पहला काम जो रहता है वह है sitting। अब sitting भी हम बच्चे को 3 types की देते हैं। पहले गोदी में फिर table-chair और last में freely।

 गोदी में गोदी में बच्चे को बैठाया जाता है। क्योंकि काफी बच्चों को touch पसंद नहीं करते ।touch लेने पर hyper होते हैं। तो सबसे पहले बच्चे को गोदी में comfortable किया जाता है,चुप करवाया जाता है, खुश किया जाता है। गोदी में sitting देने का सबसे बड़ा कारण यह होता है कि therapist की बच्चे से repo build हो सके,जो कि बहुत जरूरी है। क्योंकि बच्चा जब तक हमारे साथ attach नहीं होगा तब तक वह किसी भी काम में co-operate नहीं करेगा।

Table chair गोदी के बाद table chair पर sitting दी जाती है। ताकि बच्चा chair पर बैठना सीखे और हमारी commands follow करनी start करें।

 Freely जब बच्चा दोनों sittings लेना शुरू कर देता है। तो उसे freely sitting दी जाती है।


Exercise दूसरा जो काम होता है वह है full body exercise इसमें बच्चे की body exercise की जाती हैं। इसे touch therapy भी बोला जाता है। इससे बच्चा touch लेना शुरू करता है, गुस्सा करना कम होता है और relax होता हैं।

Eye contact  बच्चों के eye contact पर work किया जाता हैं। उसके साथ interaction किया जाता है जैसी poems, rhymes जो बच्चे को पसंद है वह खुद  गाकर बच्चे को सुनाया जाता है। जिसे बच्चा हमारी तरफ देखता है। उसे बच्चों का eye contact improve होता है और बच्चा therapist के साथ attach होना शुरू करता है।Eye contact improve करने के लिए बच्चे को अलग-अलग activities भी करवाई जाती हैं। 

Attention and concentration बच्चे की attention and concentration में सुधार करने के लिए work किया जाता है। Eye hand co-ordination बनाने पर work किया जाता है। इसके लिए CBT Therapy provide की जाती है।

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Commands following  बच्चे की commands following skill पर काम होता है।  बच्चे  से ऐसी activities करवाई जाती है, जिससे बच्चा घर पर भी थोड़ी बात सुनने और मानने लगे।

सो यह सब रहता है, जो बच्चा पहली बार Centre में आता है और यह सब काम साथ में ही होते रहते हैं क्योंकि हम एक ही काम से बच्चों की multiple skills पर काम करते हैं


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Ayush Speech & Hearing Clinic- Best Speech Therapy Centre

| Autism Treatment Centre | Occupational Therapy Centre in Hoshiarpur


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📞 Call: 098766 01972 | https://g.co/kgs/TN4ptjD
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 2025-04-25T12:59:25

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