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ऑटिज्म के लिए कौन-कौन सा Treatment किया जाता है?और...

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ऑटिज्म के लिए कौन-कौन सा Treatment किया जाता है?और बच्चों के लिए कौन सा Treatment सबसे Best  होता है?

 Autism Treatment in Hoshiarpur | Speech & Occupational Therapy for Autism in Punjab


Ayush Speech and Hearing Clinic, Hoshiarpur में Autism Spectrum Disorder (ASD) के लिए विशेषज्ञ उपचार सेवाएं प्रदान करता है। हमारे अनुभवी स्पीच थैरेपिस्ट्स और ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट्स मिलकर बच्चों की विशेष जरूरतों को समझते हैं और उनके विकास के हर कदम पर सहयोग करते हैं।

माता-पिता हमारे पास आकर पूछते हैं, की क्या ऑटिज्म के लिए कोई Medicine है? जिससे मेरा बच्चा जल्दी ठीक हो सके, तो हम उनको हम पूछते हैं, की क्या ऑटिज्म कोई बीमारी है?नहीं
ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है, यह एक neuro development disorder है l जो बच्चा अपने विकास में पीछे रह जाता है,....और बीमारी के लिए दवाई होती है ,ना कि डिसऑर्डर के लिए इसीलिए ऑटिज्म की कोई भी दवाई नहीं होती है

इसलिए हम देखेंगे की ऑटिज्म को किस तरह से मैनेज किया जा सकता है और कौन-कौन सा उपाय ऑटिज्म के लिए सही होता है इसका निर्णय आप खुद ले कि मेरे बच्चे के लिए कौन सी चीज सबसे ज्यादा बेहतर है.....

अब हम देखेंगे,कि ऑटिज्म  के लिए  कौन-कौन से Treatment किए जाते हैं


Medicine
Diet 
Therapy

medicine

जैसे कि  पहले ही बताया है ,की ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है l फिर इसके लिए क्या मेडिसिन देना सही है ,बहुत सारे माता-पिता सोचते हैं की ऑटिज्म को दवाइयों से ठीक किया जा सकता है और बहुत सारे माता-पिता इस चीज को अपनाते भी हैं ,लेकिन इसका असर थोड़े टाइम तक ही रहता है इसके बाद तो बच्चे में उसके बुरे प्रभाव दिखने शुरू हो जाते हैं l इसीलिए ऑटिज्म की कोई भी दवाई नहीं है,क्योंकि यह कोई बीमारी नहीं है l 

इस तरह से माता-पिता को यह जान लेना चाहिए ,की बच्चों को ऑटिज्म के लिए दवाई देना बिल्कुल गलत होगा l क्योंकि अगर बच्चे को कोई बीमारी है, तो उसे कंडीशन में बच्चों को दवाई देनी चाहिए... और तब दवाई असर भी करती है, लेकिन ऑटिज्म एक डिसऑर्डर है माता-पिता को इसको मैनेज करने के लिए कार्य करना चाहिए ना की दवाइयां के भरोसे रहना चाहिए l 

Diet

इसके बाद अगर हम बात करें, ऑटिज्म को diet के द्वारा भी ठीक किया जा सकता है,लेकिन कुछ लोगों का मानना होता है l की autistic बच्चों को दूध से बनी हुई वस्तुएं नहीं देनी चाहिए..लेकिन हमारा मानना यही है,की जो चीज हम अपनी रोजाना diet में लेते हैं l वह सभी खाने वाली वस्तुएं,बच्चों को खाने के लिए देनी चाहिए.. इस तरह से हम diet के माध्यम से भी बच्चों को ऑटिज्म से बाहर लाने की कोशिश कर सकते हैं l

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इसके अलावा बच्चों को मीठा नहीं देना चाहिए जो कि बच्चों को हाइपर करने का एक महत्वपूर्ण reason बन जाता है इस प्रकार से मीठे को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए ताकि किसी भी छोटी सी वजह से भी  बच्चों की समस्या नहीं बढ़ानी चाहिए इसलिए ऑटिस्टिक बच्चों के मामले में डाइट का भी खास ध्यान रखा जाना चाहिए l 

Therapy इसके अलावा थेरेपी के द्वारा भी ऑटिज्म को ठीक किया जा सकता है, और ऑटिज्म के लिए थेरेपी सबसे best treatment है l जिसके माध्यम से बच्चे को पूरी तरह से normal बनाने के chance होते हैं l 

थेरेपी के द्वारा बच्चों की sitting ,stability ,attention ,eye-contact ,concentration ... जैसी समस्या पर कार्य किया जाता है और यही से बच्चा स्कूल के लिए भी तैयार होता है इसीलिए थेरेपी सबसे बेस्ट ऑटिज्म ट्रीटमेंट माना जाता है l और थेरेपी के द्वारा बच्चों के ब्रायन पर कार्य किया जाता है ना कि उसकी दवाइयां से सुस्त किया जाता है l इस तरह से ऑटिस्टिक बच्चों की इस समस्या के लिए ABA,CBT ,OT और Speech करवाई जाती है जिसमें बिना किसी मेडिसिन के बच्चों की समस्या पर कार्य किया जाता है और इसमें अगर समय रहते हम बच्चे की थेरेपी शुरू करवा लेते हैं 

तो उतनी ही ज्यादा चांसेस होते हैं बच्चों के नॉर्मल होने के... इसीलिए जितनी जल्दी हो सके बच्चों की हैप्पी शुरू करवानी चाहिए ना कि बच्चे की समस्या को बढ़ावा देना चाहिए जिस उम्र में भी आपको पता चलता है की मेरे बच्चे में कुछ अलग सिम्टम्स दिख रही है तो आप जल्दी से जल्दी अपने किसी नजदीकी थेरेपी सेंटर में जाकर उनकी सलाह ले और अगर उनके द्वारा बोला जाता है की बच्चों को थेरेपी की जरूरत है तो इस चीज को अनदेखा न करें और जितना जल्दी हो सके तुरंत बच्चों की थेरेपी शुरू करवाई क्योंकि बच्चों की 6 साल की उम्र सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है जिसमें बच्चा अपने Learning Skills को विकसित करता है l
 
अगर एक बार 6 साल की उम्र निकल गई ,तो बच्चे में बदलाव लाना मुश्किल हो जाता है l इसीलिए जितना जल्दी हो सके बच्चों की असेसमेंट करवा के उसकी थेरेपी शुरू करवा ले, ताकि बच्चे की समस्या को बढ़ाने से रोका जाए l 

इस तरह से हम देख सकते हैं कि हमारे बच्चे के लिए कौन सा ट्रीटमेंट सबसे अच्छा है l और क्या मैं इन चीजों को अब तक अपना रहा था ,या नहीं इस तरह से आप खुद देखें और इसके बाद खुद निर्णय ले कि हमारे बच्चे के लिए कौन सा ट्रीटमेंट सबसे बेस्ट है और क्या अभी तक वह ट्रीटमेंट  हम अपने बच्चों के लिए ले रहे थे या नहीं... इस तरह से इन बातों को जानने के बाद आप खुद एक अच्छा निर्णय ले सकते हैं ।

Speech and occupational therapy, Hoshiarpur


Why Choose Us?


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Ayush Speech and Hearing Clinic
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🕒 Timings: Mon–Sat, 9am–6pm


Note

यदि आपके भी किसी बच्चे को इस तरह की समस्या है या फिर वह ऑटिज्म से सफर कर रहा है तो आप हमारे साथ संपर्क कर सकते हैं हमारे सेंटर की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन थेरेपी और असेसमेंट की जाती है बच्चों की असेसमेंट बिल्कुल फ्री की जाती है ।जब आप पहली बार आते हो तो उसमें बताया जाता है की बच्चों की समस्या क्या है ?या किस प्रकार से बच्चे की समस्या पर कार्य किया जाएगा ?आप बच्चों के साथ घर पर क्या-क्या कर सकते हो ?

और थैरेपिस्ट बच्चों के साथ कैसे कार्य करेगा ?इस तरह से यदि आपके किसी बच्चे को इस तरह की समस्या आ रही है या फिर वह टिककर नहीं बैठता ,आई कांटेक्ट नहीं करता या नाम लिए जाने पर आपकी तरफ नहीं देखता है ।‌ तो आप हमारे साथ संपर्क कर सकते हैं , हमारी केंद्र की ओर से ऑटिज्म अवेयरनेस के लिए हमेशा कोशिश की जाती है। ताकि माता-पिता की जितनी सहायता हो सके उतनी की जाए, इस तरह से आप हमारे साथ संपर्क करें और आपको आपकी समस्या का समाधान बताया जाएगा

Autism specialist in Hoshiarpur, Punjab



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 2025-04-19T17:03:52